Parivaar का माहौल बचपन में कर सकता है ४०-५० की उम्र में सेहत पर गलत असर!

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Parivaar का माहौल – अगर आपके बचपन में आपने गलत माहौल देखा है तो आपको ४०-५० की उम्र में ह्रदय की समस्या उत्पन हो सकती है। इसका खतरा अधिक बढ़ सकता है। बचपन हमारे जीवन का सबसे अहम् हिस्सा होता है। यह बढ़ती उम्र के साथ हमारे व्यक्तित्व के साथ साथ स्वस्थ्य में भी बदलाव लाती है। 

हमारी बढ़ती उम्र में हमारे आसपास के Parivaar का माहौल सबसे अहम् भूमिका निभाता है क्यूंकि यह हमारे मनोविज्ञानिक और मानसिक विकास को दर्शाता है और प्रभावित करता है।

हम बच्चो के आसपास पूरी तरह से अच्छा व्यवहार और माहौल बनाये रखे जिससे बच्चे प्रभावित न हो। लेकिन परिवार का माहौल बिगड़ जाने पर बच्चे अस्थायी तो होते ही है किन्तु वे परेशान भी हो जाते है जो उनके स्वस्थ्य पर प्रभावित करता है लम्बे वक़्त के बाद।

क्या आप जानते है इसकी रिसर्च के बारे में?

Family environment is important

रिसर्च में पाया गया है कि जिन भी बच्चो के परिवार का माहौल ठीक नहीं था, वे लोग बड़ी उम्र में दिल से संबधित बीमारियों से लड़ते है। अगर कोई भी बच्चे को दुर्व्यवहार, लड़ाई, झगड़े, ट्रामा, आदि देखते है, उन्ही को दिल कि अनेक बीमारियों का सामना करना पड़ता है। यह ४०-५० कि उम्र के बाद उनके ह्रदय कि समस्या कि सम्भावना बहुत बढ़ जाती है। यह रिसर्च बहुत सारे लोगो के बचपन का इतिहास जानकार किया गया है।

बचपन में परिवार का माहौल ख़राब होना सिर्फ बड़ी बीमारियों कि सम्भावना को नहीं बढ़ता बल्कि चिंता, डिप्रेशन, स्ट्रेस, तनाव, आदि को भी उत्पन्न करता है। और ऐसे में बच्चो को गतिहीन जीवन शैली की और बढ़ती है और जैसे धूम्रपान और नशे की लत लग जाती है या फिर शराब पिने की जैसी खराब आदतों को अपनाते है। उनकी ५० की उम्र में उनको डायबिटीज़, बीएमआई (BMI), BP, वैस्कुलर डिसइंफेक्शन, आदि से पीड़ित होने की  सम्भावना बढ़ जाती है।

बच्चो के व्यवहार में भी बदलाव आता है जैसे भोजन का ज्यादा ग्रहण करना जिससे मोटापा और वजन भी बढ़ता है – ऐसी कई समस्या उत्पन्न हो सकती है। उनमे धूम्रपान की लत भी ज्यादा होती है जिसका सीधा सम्बन्ध ह्रदय के रोग से हो जाता है।

Parivaar का माहौल खराब होने पर अपने बच्चो की मदद करे – काउंसलिंग करके।

आपके परिवार के सदस्य आपके बच्चो के परेशानी को समझ नहीं सकते है – किन्तु जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ती है उनकी परेशानिया बढ़ती जाती है। कई सारे बच्चे अपनी किशोरावस्था में ही धूम्रपान के जाल में आजाते है जिसका ध्यान सिर्फ उनके माता-पिता को रखना होगा। एक निश्चित उम्र के तुरंत बाद चीज़े नियंत्रण से बहार हो सकती है और इसको कंट्रोल करना भी मुश्किल हो सकता है। काउंसलिंग के द्वारा मदद मिल सकती है लेकिन इसमें अधिक से अधिक शोध की आवश्यकता है की क्या यह ह्रदय की समस्या को रोकने में सक्षम है, जो ४०-५० फीसदी के आखिर में उनमे प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। 

बचपन के प्रारम्भ अनुभवों का मानसिक और शारीरिक कल्याण पर एक प्रभाव करता है और बड़ी संख्या में बच्चो के व्यवहार बदल जाते है जिसका उन्हें कठोरता से सामना करना पड़ता है और यह उनके पुरे जीवन में स्वस्थ्य और सामाजिक काम के मुद्दे छोड़ देंगे।

अपना प्रयास यही रखे की आपके परिवार का माहौल बहुत ही अच्छा रहे और स्वस्थ रहे। बच्चो को लड़ाई वाले माहौल में कभी मत रखिये ये उनके स्वाभाव को बदलता है और साथ ही मानसिक तनाव की वजह से वह जल्दी ही कई बीमारियों के शिकार भी हो सकते है।

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