Padabhyanga Therapy क्या है, कैसे करें, फ़ायदे, और क्यों करना अनिवार्य है?

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Padabhyanga Therapy – बना देती है जीवन स्वस्थ।‌ पादाभ्यंग थेरेपी का अर्थ दो शब्दों में बटा हुआ हैl पहला शब्द है पद इसका अर्थ होता है पैर याँ पैर के तलवे। दूसरा शब्द है, अभ्यंग मतलब तेल लगाना (मालिश करना)। इस थेरेपी ने आयुर्वेद में अपनी एक अलग ही जगह बनाई हुई है। पैर हमारी ज़िंदगी का एक अत्यंत आवश्यक एवं महत्वपूर्ण हिस्सा है, यह तो हम जानते ही है। 

आइए जानते है, की Padabhyanga Therapy क्यों करनी चाहिए?

मालिश का महत्व तो हम सभी को पता है। किन्तु, क्यों यह पादाभ्यंग सबसे अलग है आइए जानते है – 

क्योंकि, आयुर्वेद के अनुसार जो भी व्यक्ति रोज़ पैरो पर तेल, घी याँ कोई अन्य चीज़ लगता है उसको धिर्गायू और आरोघी की प्राप्ति होती है। अभी पूरे शरीर पर तेल लगाने का समय तो मिलता नहीं होगा ज़्यादातर, तो आपको कम से कम अपने पैरों पर तेल अवश्य लगाना चाहिए। 

अंग्रेज़ी में किसी महापुरुष ने कहा है –

The personality of an individual is weighed by looking at his feet…

Padabhyanga Therapy के फ़ायदे क्या-क्या है? चलिए जानते है – 

Padabhyanga Therapy

  • पद खराटवम – पैर की खुरदरापन
  • पद स्तब्धता – पैर की कठोरता
  • और पद रोक्षयम् – पैर का सूखापन
  • पद श्रामम् – पैरों की थकान
  • पद सुपती – पैर और पैर का सुन्नपन और झुनझुनाहट कम होने लगती है।

यदि, आप नित्य पादाभ्याँग करेंगे तो यह समस्याएं कम होगी और पैरों में कोमलता आएगी। 

हम सिर्फ Cosmetic तौर पर इसकी बात नहीं कर रहे है। किन्तु, हमारे पैर दिन भर में कितना सारा काम करते है, चलना, घूमना, फिरना याँ खड़े रहना। यह ख़ासतौर पर उन लोगों को करना चाहिए जो पूरा दिन खड़े रहकर काम करते है। क्योंकि, इससे पैरों में बल आता है, स्थेर्य प्राप्त होता है और दर्द भी कम होता है। 

शरीर में होने वाली कोई भी वात व्यादी है, उसको कम करने के लिए भी यह मदद करता है।

आँखों का स्वास्थ्य सुधरने में भी मदद मिलती है। नित्य Padabhyanga Therapy  करने से आँखों की जलन, याँ फिर आँखों से संबंधित कोई बीमारी में भी सुधार आता है। यदि, आपको चश्मे के नंबर ज़्यादा है, तो आपको यह अवश्य करना चाहिए।

Padabhyanga Therapy करने से सभी प्रकार के वात विकारों का शमन होता है।

खासकर ग्रुधेसी यानी sciatica – जो कमर से लेकर पैरों तक शरीर के सारे दर्द कम होने लगते है। साथ ही शरीर में कोई जकड़न हो तो यह करने से वहां भी आराम मिलता है।

जिन लोगों को रात को नींद नहीं आती है, उन्हें भी पादाभ्यंग करना चाहिए।

मधुमेह के मरीजों के लिए घी से मालिश करना है – लाभकारी।

अब जानते है कि कब करनी चाहिए यह Therapy?

Padabhyanga Therapy

ऐसे तो यह डॉक्टर की निगरानी में होनी चाहिए। किन्तु, अब आप इसे घर पर भी कर सकते है।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए यह प्रतिदिन करना चाहिए।

  • हर रोज़ अभ्यंग करने के अद्भुत लाभ।
  • वृद्धावस्था के समय भी मदद रूप है
  • शरीर का पोषण
  • अच्छी नींद आती है
  • त्वचा में निखार आता है
  • मांसपेशियों का विकास
  • थकावट दूर होती है
  • वात संतुलन रहता है।
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आप सुबह नहाने से पहले यह कर सकते है, याँ पूरे दिन में जब भी आपको फुरसत मिले तब।

किन्तु, यह अधिक लाभकारी रात के समय इस्तेमाल करने से होगा।

कई लोग रात को देर से आने की वजह से नहीं करते है। किन्तु, ऐसे समय तो ज़रूर करना चाहिए क्योंकि इससे आपका पाचन तंत्र नियंत्रित रहता है और आपकी थकान भी दूर होती है। ऐसा करने से आपको पूरी रात बहुत अच्छी नींद आती है। 

किससे और कैसे करें?

पीतल (Bronze) के कटोरे से मालिश करना सबसे सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। क्योंकि, यह हमारे शरीर के पित दोष को कम करने में मदद रूप है। साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी फ़ायदेमंद है।

यदि, पीतल  का कटोरा ना हो तो भी कोई तकलीफ़ नहीं है। हमारे पास इस समस्या का भी हल है। 

आप अपने हाथों से 10-10 मिनट तक दोनों पैरो में मालिश करें। हो सके तो रात को सोने से पहले करें यदि, नहीं तो पूरे दिन में आप कभी भी 20 मिनट निकाल कर यह कर सकते है। आपको दोनों पैरो में धीरे धीरे मालिश करनी होगा हल्के हाथों से। फिर 20 मिनट बाद इसे अच्छे से साफ कर लेना है याँ आप धो भी सकते है। 20 मिनट बाद कई लोगों के पैरो का रंग Grey एवं Black हो जाता है। इसमें घबराने वाली कोई बात नहीं है। यह ज़्यादातर लोगों को होता ही है।  क्योंकि, इससे शरीर का दोष कम होता है ऐसा माना जाता है।

आप घी, तिल का तेल, याँ फिर किसी भी तेल का उपयोग कर सकते है। किन्तु, घी गाय का ही होना चाहिए। 

कब इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?

  • किन्तु, खाने के ठीक बाद कभी भी यह अभ्यंग ना करें। भोजन के कम से कम 1 से 2 घंटे बाद ही करें। 
  • सर्दी याँ खांसी के समय करना यह उचित नहीं होगा।
  • Fracture याँ फिर कोई Infection हुआ ही तब भी यह ना करें।