गर्भवस्ता के समय क्या करे और क्या ना करे?

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जगत में महिलाओं को मिलता है ईश्वर से भी ऊपर का स्थान जब वह देती है एक नन्हे से बालक को जन्म। कहते है महिलाओं  के एक से ज़्यादा जन्म होते है।परन्तु, उन सब में से सबसे श्रेष्ठ जन्म है जब वो खुद एक मां बनती है सारी कठिनाइयों और दर्द को पीछे छोड़ कर। गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के समय उन महिलाओं को २० हड्डियां टूटने जितना दर्द होता है। पर इस समय के आने से पहले उनको बहुत सारी चीजों का खयाल रखना पढ़ता है। उनके पूरे शरीर में कई सारे परिवर्तन आते है जैसे – दिल मचलना, बार-बार उल्टी आना, वजन बढ़ना, पेट में दर्द होना, आदि।

तो आइए जानते है, गर्भवस्ता के दौरान क्या करना और क्या ना करना चाहिए

पहले के तीन महीनों में

गर्भवती महिलाओं के लिए पहले के तीन महीने बहुत महत्वपूर्ण होते है। यदि, पहले के तीन महीने संभल गए तो बाद में इतनी दिक्कते नहीं आती है। पहले के तीन महीनों में अच्छे से आराम करना चाहिए। समय से पोष्टिक आहार ग्रहण करना चाहिए। हो सके तो हर तीन से चार घंटे बाद कुछ ना कुछ पोष्टिक आहार ले। बहार का खाना बिल्कुल भी ना खाए। क्योंकि पहले के तीन महीनों में पहले से ही ज़्यादा चक्कर आते है और ऐसे में आपका बहार का खाना काफी खतरनाक हो सकता है। गलती से भी पहले के तीन महीनों में भाग-दौड़ ना करे और न तेज़ चले या फिर कही गिरे न। अपने इष्ट देव या जिस ईश्वर को आप मानते हो उनका नाम लेना चाहिए। सकारात्मक विचार रखे और किताबें पड़े। ऐसे समय में नींद ज़्यादा आएगी पर ज़्यादा सोना नहीं चाहिए। कोई भी भारी समान नहीं उठाना चाहिए।

तीन महीनों के पश्चात ।

अब तीन महीनों के पश्चात आपका पेट निकाल ना शुरू हो जाता है, आपका वजन बढ़ना भी शुरू हो जाता है। किसी चीजों में ज्यादा मन नहीं लगता है और कई बार कुछ खाने का मन भी नहीं होगा परन्तु आपके लिए और आपके बच्चे के लिए बुखा रहना हानिकारक हो सकता है। बारिश में ना भीगे। आपको कई बार कई चीज़ो की महक भी नहीं पसंद आएगी। प्राणायाम करना चाहिए जैसे – अनुलोम विलोम। ताज़ी प्राकृतिक हवा में बैठना या चलना चाहिए। सुबह की धूप में खड़े रहना चाहिए कुछ देर के लिए। ऐसे समय में डायरी लिखना चाहिए। ऐसे समय खुद का ज़्यादा खयाल रखें क्योंकि, आप के अंदर एक ओर अंश पल रहा है। त्वचा पहले से ज़्यादा खूबसूरत होने लगती है।

क्या क्या खाना चाहिए?

नारियल पानी में बहुत गुणकारी है, तो उसे अवश्य पीना चाहिए। केसर का दूध, बदाम, सेब, पालक, टमाटर, जैसी चीजों का सेवन करना चाहिए जितना हो सके उतना ताज़े फल और सब्जियों का सेवन करे। ठंडी कोल्ड ड्रिंक या पानी भी नहीं पीना चाहिए। गर्भवस्ता के समय में कुदरती कुछ अलग-अलग खाने का मन होता है, खास कर खट्टी चीज़े। भूल कर भी पपीता ना खाए यह खाना मां और बच्चे दोनों  को नुकसान कर सकता है।

गर्भवस्ता के समय में दिल नहीं दुखाना चाहिए और उदास नहीं होना चाहिए बच्चे पर इसका गहरा असर पढ़ता है।

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