Depression की बीमारी क्या है? जानिए उसके लक्षण, कारण और रामबाण इलाज।

Depression एक मानसिक बीमारी होती है। व्यस्त जीवनशैली के चलते लोग इस बीमारी का शिकार होते है। आज के समय लोग Success का पीछा करने में इतने व्यस्त है कि उन्हें खुद की सेहत का खयाल ही नहीं रहता है। यदि, व्यक्ति Depression में हो तो उसे कुछ करने का मन नहीं होता है और वह हर समय बहुत उदास ही रहता है। कई बार इसके चलते लोग Sucide भी करते है। किसी भी बात या फिर किसी गंभीर विषय में आप ज़्यादा सोचते हो तो भी आपको इस समस्या का सामना करना पढ़ सकता है। 

Depression की बीमारी से सम्बन्धित कुछ महत्वपूर्ण बातें – 

Depression!

  • एक शोध से पता चला है, कि 30 Crore से ज़्यादा लोग इस Depression की बीमारी से जूझ रहे है।
  • यह भी कहा जाता है, की 2030 के आते आते यह बीमारी मनुष्य पर काफी हावी हो चुकी होगी। जो असमर्थता का एक कारण होगी।
  • वास्तव में यह बीमारी 21 वी सदी से पहले भी थी किन्तु, इसका प्रकोब इस सदी में तकरीबन 10 गुना अधिक है।
  • पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस बीमारी से ज़्यादा पीड़ित होती है – ऐसा माना जाता है।

Depression की बीमारी – आइए सबसे पहले जानते है, अवसाद और उदासी में फर्क क्या है?

जैसा कि आप जानते ही होंगे की “मनुष्य का मन बहुत चंचल होता है”। उदास होने का मतलब कई बार मौसम और कई छोटी बड़ी घटनाएँ जिससे हमें दुःख होता है। जब तनाव के कारण व्यक्ति हर समय यही सोचता है, कि वह ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता और वह हार चुका है ज़िंदगी के सामने तो यह डिप्रेशन है। इन दोनों में फर्क इनके लक्षण और समय के ऊपर निर्भर है। यदि, दो सप्ताह से ज़्यादा हो तो यह डिप्रेशन होने की संभावना है।

अंग्रेज़ी में किसी महापुरुष ने कही एक बात आपको अवश्य समझनी चाहिए।

“When you’re depressed you don’t control your thoughts, your negative  thoughts will control you. I wish people understood that.”

इसका मतलब जब आप अवसाद होते है, तब आपके नकारात्मक विचार आप पर हावी होते है, मतलब कंट्रोल करते है।

क्या क्या लक्षण है, Depression की बीमारी के?

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Symptoms of Depression in Hindi - अवसाद के लक्षण!

मनोदशा (Mood) – चिंता, बेवजह परेशान होना, सामान्य असंतोष, निराशा, रुचि की हानि, गतिविधियों में रुचि, अचानक मूड बदलना, या उदासी।

व्यवहार (Behaviour) – अधिक गुस्सा, अत्यधिक रोना, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, या सामाजिक बदलाव।

संपूर्ण शरीर (Full body) –  अत्यधिक भूख, थकान, भूख न लगना, बहुत ज़्यादा सोना, यां फिर बिलकुल नींद नहीं आना।

अन्य लक्षण इस Depression की बीमारी के।

  • एकाग्रता की कमी
  •  गतिविधि में सुस्ती
  •  आत्महत्या के विचार
  • अधिक वजन घटना यां बढ़ना
  • पीठ में दर्द
  • खुद को हर समय दोषी महसूस करना।

Depression की बीमारी होने का कारण?

कोई भी एक कारण नहीं है जिसके कारण अवसाद होता है। अवसाद के लिए कई कारण जिम्मेदार है।

जेनेटिक (Genetics)

कुछ लोगों के जीन विरासत (Inherit Genes) होते  है जो अवसाद का कारण होता है। लेकिन हर कोई जिनके परिवार में किसी सदस्य को यह बीमारी है उसे भी हो ही यह ज़रूरी नहीं है। ऐसे भी कई सारे लोग है, जिनके परिवार में किसी को यह बीमारी नहीं है तो भी उन्हें यह समस्या का सामना करना पढ़ता है।

तनाव और व्यसनों।

बहुत अधिक तनाव लेना, शराब या ड्रग्स का उपयोग करना, और hormone परिवर्तन भी मनोदशा को प्रभावित करते है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में अवसाद जैसे लक्षण हो सकते है। उदाहरण के लिए, हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism) को लोगों में उदास मनोदशा का कारण माना जाता है।

जीवन की कुछ घटनाएँ।

परिवार के किसी सदस्य, मित्र या प्रिय जन की मृत्यु कभी-कभी सामान्य दुःख से परे हो जाती है और इससे Depression की बीमारी हो सकता है। अन्य कठिन जीवन की घटनाओं जैसे कठोर पालन-पोषण, तलाक, परीक्षा तनाव। इसके अलावा कोई पुरानी बीमारी जैसे हृदय या तंत्रिका संबंधी समस्याएं – अवसाद को ट्रिगर कर सकती है। जीवन की कठिन परिस्थितियाँ अवसाद का कारण बनती है या नहीं। इस बात पर निर्भर होता है, कि व्यक्ति कितनी अच्छी तरह से सामना कर पाता है किसी भी परिस्थिति का।

पारिवारिक और सामाजिक वातावरण

कुछ लोगों के लिए, एक नकारात्मक, तनावपूर्ण या दुखी पारिवारिक वातावरण अवसाद का कारण बन सकता है। अन्य उच्च-तनाव वाली जीवित परिस्थितियाँ – जैसे गरीबी, बेघर, या हिंसा – भी यह बीमारी की समस्या उत्पन कर सकते है। छेड़ खानी या किसी का बेरेमी से मज़ाक अड़ाना भी अवसाद का कारण हो सकता है।

सोशल मीडिया का आकर्षण (Social Media addiction)

यह बीमारी ज़्यादातर 18-33 साल के उम्र के लोगों में होती है। इस बीमारी के चलते व्यक्ति अपना 60% से अधिक समय चिंता में व्यतीत कर देता है। आज कल के ज़्यादातर लोग इंटरनेट पर इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि चीज़ों को इस्तेमाल करने में अपना अधिक समय व्यतीत करते है। किन्तु, इससे उनकी सेहत और मानसिक स्थिति खराब होती जाती है। जिससे Depression होने की संभावना अधिक हो सकती है।

तनाव में रहने के कारण व्यक्ति खुद से और बाकी सबसे झूठ बोलने लगता है।

क्या है Depression की बीमारी का इलाज?

डिप्रेशन से कैसे बचे?

ज़्यादातर लोग यह सोच कर परेशान रहते है कि कल क्या होगा। किन्तु हमे हमेशा आज में जीना चाहिए। 

कल जो बीत गया वह आने वाला नहीं है, तो उसके बारे में सोच कर क्यों अपना समय खराब करना। कल जो होने वाला है, वो भी हमें पता नहीं है।

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इसलिए आज के बारे में सोचिए कल की ग़लतियों से सीख कर आज कोशिश कीजिए तब ही भविष्य में सफलता हासिल होगी।

गाने सुने।

आप गाने सुनने की आदत डालें जिससे आप खुश होते हो। ऐसा गाना सुनने की आदत डालें जिससे आपके मन में सकर्तामक खयाल आते हो।

8 गिलास पानी और 8 घंटे नींद अवश्य लें।

हर सुबह उठने से पानी पिए इससे आपका मन प्रफुल्लित रहेगा। हाइड्रेशन (Hydration) की कमी के कारण हमारे दिमाग में खराब खयाल आते है यां फिर कुछ भी हम सोच नहीं पाते है अच्छे से। प्रतिदिन 8 घंटे की नींद लें। यदि, अच्छे से होगी तो दिमाग तरोताजा रहेगा। हर रोज़ रात को जल्दी सोने की आदत डालें और सुबह जल्दी उठने की भी। इससे आप हर सुबह का खुश नुमा मौसम देख पाएंगे जिससे आपको ताज़गी महसूस होगी जो आपके नकारात्मक विचार को खत्म करने में सहायता करेगा।

गहरी सांस लेने की आदत डालें।

जब भी आप गहरी सांस लेते है, तब आपकी इन्द्रियों को आराम मिलता है। जिससे आपका तनाव, क्रोध, नकारात्मक विचार की गति कम होने लगती है। इसीलिए जब कोई तनाव में होता है, हम उन्हें गहरी सांस लेने को कहते है। ऐसा प्रतिदिन कुछ समय करने से भी आपको फर्क नज़र आने लगेगा। अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें।

व्यवहार बदलने की कोशिश करें।

जैसा व्यवहार आप चाहते है, लोग आपसे करें वैसा व्यवहार आपको उनके साथ कारण होगा। क्रोध से कुछ हासिल नहीं होगा। ज़रूरी नहीं है, की आप ही हमेशा सही हो कई बार गलती हमारी होती है और गुस्से में हम किसी को कुछ भी बोल देते है। कोशिश करें हर समय आप सकारात्मक सोचें। 

सर्वश्रेष्ठ मित्र रखें।

मित्र का मतलब कोई आपकी उम्र का व्यक्ति हो ज़रूरी नहीं। वह आपका प्रतिबिं यानी आप खुद के सबसे अच्छे मित्र हो। यदि, आप ही खुद के बारे में अच्छा नहीं सोचेंगे तो लोग कैसे सोचेंगे। आप अपने माता पिता या फिर जिस पर आप बहुत भरोसा करते हो उनकी मदद लें। हो सके तो हर रोज़ अपनी मन की बात एक डाइरी में लिखे या किसी व्यक्ति को कहें। जब भी कभी Sucide यां नकारात्मक विचार आएं तो पहले यह सोचे कि आपके इस कदम से कितने ज़्यादा फ़ायदे होंगे आपको। जवाब बेशक कुछ भी नहीं होगा यह विचार सिर्फ कुछ समय के लिए होता इन्हे हावी मत होने दें खुद पे।

  • हर रोज़ 20 मिनट चलने कि आदत डालें।
  • जंक फ़ूड न खाएं, पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें।
  • सोने से पहले दूध पीने की आदत डालें।
  • गैजेट्स (Gadgets) का इस्तेमाल कम से कम करें। अपने परिवार के साथ अधिक समय व्यतीत करें।

 

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यदि, आप किसी डिप्रेशन से पीड़ित मरीज़ को जानते है, तो उन्हें खुश रखिए और Motivate कीजिए। अब तक लाखों लोग इस बीमारी से बाहर आ चुके है।

Depression की बीमारी यदि ज़्यादा हो तो काउंसलर (Counsellor), साइकॉलजिकल (Psychological) इलाज करवाना अनिवार्य है। कई बार इसके इलाज के लिए ऐंटी-डिप्रेसेंट भी दी जाती है।